अपनी आँखों को पहुंचा सकते हैं बेहद नुकसान,सर्दियों में आँखों के साथ नीचे लिखी चीजें न करें !

ठंड के मौसम में आंखों की देखभाल को नजरंदाज करना परेशानी भरा हो सकता है।

ठंड के मौसम में आंखों की देखभाल को नजरंदाज करना परेशानी भरा हो सकता है।
पिछले कुछ दिनों से अस्पतालों में ड्राई आई सिंड्रोम (आंखों में सूखापन) की बीमारी के मरीजों की संख्या में 15 से 20 फीसदी का इजाफा हुआ है।
सर्दियों में विभिन्न कारणों के चलते आंखों की पहली परत जिसे टियर फिल्म कहते हैं उसमें सूखापन आ जाता है। इससे लोगों को ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या होती है।
नेत्र चिकित्सकों का कहना है कि सर्दियों में लोग हीटर और ब्लोअर का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं। जिसके चलते आंखों की नमी खत्म होने लगती है। इसके अलावा सर्दियों में व्यायाम नहीं करने के कारण कई लोगों में थायरॉयड व डायबिटीज की समस्या बढ़ जाती है।
इससे भी लोग इस बीमारी की चपेट में आते हैं। इसकी शुरुआत आंखों में जलन से होती है। धीरे-धीरे आंखों में दर्द शुरू हो जाता है, पानी निकलने लगता है और धुंधलापन आ जाता है। लंबे समय तक इलाज न कराया जाए तो इससे आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है।
इस संबंध में नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. भूपेश श्रीवास्तव का कहना है कि सर्दियों में ब्लोअर और हीटर आदि का इस्तेमाल संभल कर करना चाहिए। कई बार लोग ब्लोअर चलाकर सो जाते हैं। इससे अक्सर आंखों में समस्या आती है।
डॉ. उमादत्त शर्मा ने कहा कि ड्राई आई सिंड्रोम खासतौर पर सर्दियों के दौरान होता है। दरअसल बाहर सर्द व सूखी हवा और घर के अंदर गर्म हवा होने से आंखों पर बुरा असर डालती हैं। इसी से ड्राई आई सिंड्रोम होता है। यह समस्या खासतौर पर 55 से 60 साल के लोगों को ज्यादा होती है।
यह जरूरी नहीं कि बाहरी कारणों के चलते ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या हो। कई बार शरीर में अन्य बीमारियों के चलते भी आंखों में संक्रमण हो जाता है। खासतौर पर वायरल के दौरान सेहत का ध्यान रखना जरूरी है नहीं तो संक्रमण आंखों तक फैल सकता है।
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